तस्य संजनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान्।।१।१२।।
तस्य = उसका ; संजनयन् = बढ़ाते हुए ; हर्षं = हर्ष ; कुरुवृद्ध : = कुरुवंश के वयोवृद्ध ; पितामह = दादा ; सिंहनादं = सिंह के समान गर्जना ; ( विनद्योच्चै: = विनद्य + उच्चै: ); विनद्य = गरजकर ; उच्चै: = जोर से ; शङ्खं = शंख ; दध्मौ = बजाया ; प्रतापवान् = बलशाली।
तभी कुरुवंशियों के वयोवृद्ध परम प्रतापी पितामह भीष्म ने सिंह के समान गर्जना करने वाले अपने शंख को जोर से बजाया जिसे सुनकर दुर्योधन को अपार हर्ष हुआ।
प्रतापी पितामह भीष्मवर ने, शंख बजाया अति जोर से।
शंख-ध्वनि सिंहनाद सुनकर, दुर्योधन खुश हैं शोर से ।।१।१२।।
हरि ॐ तत्सत्।
- श्री तारकेश्वर झा 'आचार्य'
हरि ॐ तत्सत्।
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