उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन ।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ।।१।४४।।
उत्सन्नकुलधर्माणाम् = नष्ट हुए कुलधर्म वाले; मनुष्याणाम् = मनुष्यों का; जनार्दन =श्री कृष्ण; नरके = नरक में;अनियतम् = अनन्त कालतक; वास: = वास; (भवतीत्यनुशुश्रुम=भवति+इति+अनुशुश्रुम्); भवति = होता है; इति=इस प्रकार; अनुशुश्रुम =सुना है।
हे जनार्दन ! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चित काल तक नरक में वास होता है, इस प्रकार हम सुनते आये हैं ।।१।४४।।
कुलधर्म नष्ट हुआ जिनका,कृष्ण!नरक वे पाते हैं।
सुना है नर नरकवास में अनंत काल रह जाते हैं।।१।४४।।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ।।१।४४।।
उत्सन्नकुलधर्माणाम् = नष्ट हुए कुलधर्म वाले; मनुष्याणाम् = मनुष्यों का; जनार्दन =श्री कृष्ण; नरके = नरक में;अनियतम् = अनन्त कालतक; वास: = वास; (भवतीत्यनुशुश्रुम=भवति+इति+अनुशुश्रुम्); भवति = होता है; इति=इस प्रकार; अनुशुश्रुम =सुना है।
हे जनार्दन ! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चित काल तक नरक में वास होता है, इस प्रकार हम सुनते आये हैं ।।१।४४।।
कुलधर्म नष्ट हुआ जिनका,कृष्ण!नरक वे पाते हैं।
सुना है नर नरकवास में अनंत काल रह जाते हैं।।१।४४।।
हरि ॐ तत्सत्।
- श्री तारकेश्वर झा 'आचार्य'
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