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सोमवार, 12 फ़रवरी 2024

श्रीमद्भगवद्गीता दैनिक पाठ 001-01-001(हिन्दी पद्यानुवाद सहित)


धृतराष्ट्र उवाच-
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत् सञ्जय।।१।१।।
धृतराष्ट्र = धृतराष्ट्र: = धृतराष्ट्र ने ; उवाच = कहा ; धर्मक्षेत्रे = धर्मक्षेत्र में ; कुरुक्षेत्रे = कुरुक्षेत्र में ; समवेता = एकत्रित ; युयुत्सव: = युद्ध की इच्छावाले (युयुत्सु बहु०) ; मामका: = मेरे पुत्रों ने ; (पाण्डवाश्चैव = पाण्डवा: + च + एव ) ; पाण्डवा: = पाण्डु के पुत्रों ने ; च = और ; एव = निश्चय ही; ( किमकुर्वत् = किम् +अकुर्वत् ) ; किम् = क्या ; अकुर्वत् = किया ; संजय = हे संजय !
राजा धृतराष्ट्र ने कहा-
हे संजय ! धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में एकत्रित हुए युद्ध की इच्छावाले मेरे और राजा पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया ? ।।१।१।।
धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में, जुटे सब लड़ने को अहो।
मेरे और पाण्डु सुतों ने, क्या किया संजय कहो।।१-१।।
हरि ॐ तत्सत्।
- श्री तारकेश्वर झा 'आचार्य'

4 टिप्‍पणियां:

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  2. अध्ययन की सुगमता हेतु यह सरल और सहज क्रमिक रूप से उपलब्ध रहेगा। स्वरचित हिन्दी पद्यानुवाद मूल श्लोकों के भाव को याद रखने में पाठकों के लिए श्रेष्ठ-सेव्य है।

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