भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च।।१।।८।।
भवान् = आप ; (भीष्मश्च = भीष्म: + च ) ; भीष्म: = भीष्म पितामह ; ( कर्णश्च = कर्ण: + च ) ; कर्ण: = कर्ण ; ( कृपश्च = कृप: + च ) ; कृप: = कृपाचार्य ; समितिञ्जयः = सदा संग्राम में विजयी ; = अश्वत्थामा ; (द्रोणाचार्य का पुत्र ) ; ( विकर्णश्च = विकर्ण: + च ) ; विकर्ण: = विकर्ण ; ( सौमदत्तिस्तथैव = सोमदत्ति: + तथा + एव ) ; सौमदत्ति: = सोमदत्त का पुत्र ; एव = निश्चय ही।
मेरी सेना में स्वयं आप, भीष्म पितामह, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण तथा सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवा हैं - जो सभी सदा संग्राम विजयी रहे हैं।
मेरे दल में आप भी हैं,भीष्म कृपा और कर्ण हैं।
संग्राम भूमि में सदा विजयी, अश्वत्थ भूरि विकर्ण हैं।।१।८।।
हरि ॐ तत्सत्।
- श्री तारकेश्वर झा 'आचार्य'
हरि ॐ तत्सत्।
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